स्नोडेन और NSA: दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल जासूसी की कहानी
प्रस्तावना: मीरा होटल का कमरा नंबर १०१४ और रूबिक्स क्यूब जून २०१३ की एक उमस भरी सुबह, हांगकांग का मीरा होटल एक सामान्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा केंद्र की तरह लग रहा था। लॉबी में पर्यटक और व्यवसायी अपनी दुनिया में व्यस्त थे। लेकिन इस साधारण दृश्य के बीच, इतिहास की सबसे बड़ी खुफिया सेंधमारी का अंतिम अध्याय लिखा जा रहा था। एक २९ वर्षीय युवक, एडवर्ड जोसेफ स्नोडेन , अपने हाथ में एक रूबिक्स क्यूब (Rubik’s Cube) थामे खड़ा था। यह कोई खिलौना नहीं था, बल्कि एक पूर्व-निर्धारित संकेत था, एक गुप्त कोड, जिसे उसने दो पत्रकारों, ग्लेन ग्रीनवाल्ड और लौरा पोइत्रास, को अपनी पहचान सुनिश्चित करने के लिए चुना था, जिनसे वह पहले कभी नहीं मिला था । स्नोडेन, जो उस समय एनएसए (National Security Agency) के लिए काम करने वाली डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर फर्म 'बूज़ एलेन हैमिल्टन' (Booz Allen Hamilton) में एक इंफ्रास्ट्रक्चर विश्लेषक थे, के पास होटल के कमरे में मौजूद चार लैपटॉप्स में अमेरिकी खुफिया इतिहास के सबसे काले राज कैद थे। ये दस्तावेज़ केवल मेमो या ईमेल नहीं थे; ये एक ऐसी वैश्विक निगरानी प्रणाली के ब...